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बिना तेल का खाना बनाने के लिए सबसे अच्छे मिट्टी के बर्तन

क्या मिट्टी के बर्तन बिना तेल के खाना पका सकते हैं? जानिए इस लेख में मिट्टी के बर्तनों के फायदे और कैसे ये आपकी कुकिंग को नेचुरल और हेल्दी बना सकते हैं। एल्युमीनियम छोड़कर मिट्टी का उपयोग करें!बिना तेल का खाना बनाने के लिए सबसे अच्छे मिट्टी के बर्तन

नेचुरोपैथी साइंस

Rajesh Kumar

4/12/20261 मिनट पढ़ें

बिना तेल का खाना बनाने के लिए सबसे अच्छे मिट्टी के बर्तन
बिना तेल का खाना बनाने के लिए सबसे अच्छे मिट्टी के बर्तन

मेरे प्यारे दोस्तों, कैसे हैं आप सब? उम्मीद है सब बढ़िया होगा। आज मैं आपके साथ एक ऐसी बात साझा करने जा रहा हूँ जो मेरे दिल के बहुत करीब है। क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे दादा-दादी के ज़माने में लोग इतने फिट और तंदुरुस्त क्यों रहते थे? जबकि आज हम जिम जाते हैं, डाइट चार्ट फॉलो करते हैं, फिर भी वो बात नहीं आती। इसका एक बहुत बड़ा राज छिपा है—मिट्टी के बर्तनों में।

आजकल हर कोई अपनी सेहत को लेकर काफी सजग हो गया है। कोई जिम जा रहा है, तो कोई योगा कर रहा है। लेकिन जहाँ तक वास्तविकता की बात है, हम सबसे बड़ी गलती अपनी रसोई में कर रहे हैं। हम महंगे-महंगे नॉन-स्टिक पैन और एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना बनाते हैं। मुझे लगता है कि असली सेहत तो उस मिट्टी की सोंधी खुशबू में छिपी है, जिसे हम कहीं पीछे छोड़ आए हैं। चलिए, अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि बिना तेल का खाना बनाने के लिए कौन से मिट्टी के बर्तन आपके लिए बेस्ट रहेंगे।

जब मैंने पहली बार मिट्टी की हांडी खरीदी

मेरे अनुभव में आया कि हम स्वाद के पीछे भागते-भागते अपनी सेहत से समझौता कर लेते हैं। मुझे याद है, कुछ साल पहले तक मेरा पेट अक्सर खराब रहता था। डॉक्टर ने कहा कि तेल-मसाला कम करो। मैंने कोशिश की, लेकिन स्टील या नॉन-स्टिक में बिना तेल की सब्जी बनाना मतलब उसे जलाना जैसा था। फिर एक दिन मेरी नानी ने मुझे सलाह दी, "बेटा, एक बार मिट्टी की हांडी में दाल बनाकर देख।"

सच कहूँ तो मुझे पहले यकीन नहीं हुआ। मुझे लगा मिट्टी का बर्तन तो टूट जाएगा या उसमें खाना चिपक जाएगा। लेकिन जब मैंने पहली बार उस काली मिट्टी की हांडी में बिना एक बूंद तेल के दाल बनाई, तो उसका स्वाद किसी फाइव स्टार होटल के खाने से भी बेहतर था। मुझे तब समझ आया कि मिट्टी खुद ही एक जादू है।

मिट्टी के बर्तनों में बिना तेल के खाना कैसे पकता है?

आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि बिना तेल के खाना मिट्टी में कैसे पक जाता है? दरअसल, मिट्टी के बर्तनों में बहुत छोटे-छोटे छेद होते हैं, जिन्हें हम अपनी आँखों से नहीं देख सकते। ये छेद गर्मी और नमी को धीरे-धीरे पूरे बर्तन में फैलाते हैं। जब आप इसमें खाना पकाते हैं, तो खाने का अपना प्राकृतिक तेल और नमी (Moisture) ही उसे पकने में मदद करती है।

मैंने देखा है कि एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना बहुत जल्दी गर्म होकर जलने लगता है, इसलिए हमें तेल डालना पड़ता है। लेकिन मिट्टी धीरे-धीरे गर्म होती है। यह खाने के पोषक तत्वों को खत्म नहीं होने देती।

बिना तेल की कुकिंग के लिए सबसे अच्छे मिट्टी के बर्तन

अगर आप भी मेरी तरह जीरो ऑयल कुकिंग (Zero Oil Cooking) शुरू करना चाहते हैं, तो आपको कुछ खास तरह के बर्तनों को अपनी रसोई का हिस्सा बनाना चाहिए। आइए अब जानते हैं इनके बारे में:

1. गहरी काली मिट्टी की हांडी (Black Clay Handi)

अगर आपको दाल, चावल या कोई रसेदार सब्जी बनानी है, तो काली मिट्टी की हांडी से बेहतर कुछ नहीं है। काली मिट्टी में गर्मी सहने की क्षमता लाल मिट्टी से थोड़ी ज्यादा होती है। मुझे लगता है कि काली मिट्टी की हांडी में जब दाल धीमी आंच पर पकती है, तो उसका प्रोटीन सुरक्षित रहता है। मैंने खुद महसूस किया है कि इसमें बनी दाल खाने के बाद पेट भारी नहीं लगता।

2. मिट्टी की कड़ाही (Clay Kadai)

सूखी सब्जियां जैसे भिंडी, आलू या गोभी बनाने के लिए मिट्टी की कड़ाही बहुत अच्छी होती है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि बिना तेल के भिंडी चिपक जाती है। लेकिन अगर आप मिट्टी की कड़ाही को अच्छे से तैयार (Seasoning) कर लें, तो इसमें सब्जी बिल्कुल नहीं चिपकेगी। इसका घेरा थोड़ा फैला हुआ होता है, जिससे भाप अच्छे से बाहर निकलती है और सब्जी खिली-खिली बनती है।

3. मिट्टी का तवा (Clay Tawa)

मेरे घर में अब लोहे के तवे की जगह मिट्टी के तवे ने ले ली है। बिना तेल या घी के परांठे या रोटी बनाने के लिए यह सबसे बेस्ट है। मिट्टी के तवे पर बनी रोटी फूलती भी अच्छी है और वह ज्यादा समय तक नरम रहती है।

4. दही जमाने के लिए मिट्टी का कुल्हड़ या हांडी

बिना तेल के खाने की बात हो रही है, तो रायता या दही का जिक्र तो होगा ही। मिट्टी के बर्तन में जमा दही इतना गाढ़ा और मीठा होता है कि आप बाजार वाला दही भूल जाएंगे। मिट्टी दही का अतिरिक्त पानी सोख लेती है, जिससे वह मलाई जैसा निकलता है।

लाल मिट्टी या काली मिट्टी: क्या है फर्क?

अक्सर दोस्त मुझसे पूछते हैं कि "यार, दुकान पर लाल बर्तन भी मिलते हैं और काले भी, कौन सा लें?" जहाँ तक मेरा अनुभव है, दोनों ही अच्छे हैं, बस उनका बनाने का तरीका अलग होता है।

लाल मिट्टी: इसे खुली आग में पकाया जाता है। यह दिखने में बहुत सुंदर होते हैं और रोज़मर्रा की कुकिंग के लिए अच्छे हैं।

काली मिट्टी: इसे धूँए के साथ बंद भट्टी में पकाया जाता है, जिससे इसका रंग काला हो जाता है। यह थोड़ी ज्यादा मजबूत मानी जाती है और इसमें खाना चिपकने की संभावना कम होती है।

अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो मैं कहूंगा कि एक काली मिट्टी की हांडी से शुरुआत करें।

मिट्टी के बर्तन खरीदने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

बाजार में आजकल बहुत मिलावट हो रही है। मैंने देखा है कि कुछ लोग साधारण मिट्टी के बर्तनों पर पेंट या वार्निश लगा देते हैं ताकि वो चमकें। आपको ऐसे बर्तनों से बचना है।

चमक से बचें: अगर बर्तन बहुत ज्यादा चमक रहा है, तो समझ लीजिए उस पर केमिकल का लेप है। असली मिट्टी का बर्तन थोड़ा खुरदरा और मैट फिनिश वाला होगा।

आवाज से पहचानें: बर्तन को हल्का सा उंगली से ठोक कर देखें। अगर 'टन-टन' जैसी धातु जैसी आवाज आए, तो मतलब वह अच्छी तरह पका हुआ है।

भारीपन: असली और अच्छी मिट्टी का बर्तन थोड़ा वजनदार होता है।

नए बर्तन को इस्तेमाल करने का मेरा जादुई तरीका (Seasoning)

मिट्टी का बर्तन लाकर सीधे गैस पर मत रख देना, वरना वह चटक जाएगा। मैंने शुरू में यह गलती की थी। मिट्टी के बर्तन को 'तैयार' करना पड़ता है। आइए जानते हैं कैसे:

सबसे पहले नए बर्तन को 24 घंटे के लिए साफ पानी में डुबोकर रख दें। इससे मिट्टी पानी पी लेगी और मजबूत हो जाएगी।

अगले दिन उसे धूप में सुखाएं।

जब सूख जाए, तो उसके अंदर और बाहर थोड़ा सा खाने का तेल (सिर्फ पहली बार) और हल्दी लगाकर उसे छोड़ दें।

अब उसमें थोड़ा पानी और चावल का मांड (पसावन) डालकर धीमी आंच पर उबालें।

जब वह उबल जाए, तो उसे ठंडा करके धो लें।

अब आपका बर्तन बिना तेल की कुकिंग के लिए बिल्कुल तैयार है!

मिट्टी में खाना बनाने के कुछ खास टिप्स

मेरे प्यारे दोस्तों, मिट्टी में खाना बनाना एक कला है। इसमें थोड़ा धीरज (Patience) चाहिए होता है।

हमेशा धीमी आंच: मिट्टी के बर्तन को कभी भी तेज़ आंच पर न रखें। यह धीरे-धीरे गर्म होता है और काफी देर तक गर्म रहता है। धीमी आंच पर बना खाना ज्यादा स्वादिष्ट होता है।

हल्के हाथों से सफाई: इसे धोने के लिए कभी भी साबुन या सर्फ का इस्तेमाल न करें। मिट्टी के छेदों में साबुन फंस सकता है जो बाद में खाने में जाएगा। इसे साफ करने के लिए गर्म पानी और नारियल के छिलके या थोड़े से सूखे आटे या राख का इस्तेमाल करें।

गर्म बर्तन पर ठंडा पानी न डालें: अगर बर्तन गैस से उतारा है और बहुत गर्म है, तो उसे तुरंत ठंडे पानी के नीचे न रखें। इससे वह टूट सकता है।

मेरी राय: क्या आपको इसे अपनाना चाहिए?

सच कहूँ तो, शुरुआत में आपको थोड़ा अजीब लग सकता है। आपको लगेगा कि खाना पकने में समय लग रहा है। लेकिन जब आप पहली बार बिना तेल के बनी उस सब्जी को चखेंगे, जिसमें मसालों का असली स्वाद उभर कर आएगा, तो आप नॉन-स्टिक बर्तनों को फेंक देंगे।

मैंने देखा है कि मिट्टी के बर्तन में बना खाना खाने से एसिडिटी और गैस की समस्या लगभग खत्म हो जाती है। हमारे शरीर को मिट्टी से मिलने वाले 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व (जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन) मिलते हैं। स्टील या एल्युमीनियम में ये सब नहीं मिलता।

तो दोस्तों, अगर आप भी अपनी सेहत को लेकर गंभीर हैं और बिना तेल का स्वादिष्ट खाना खाना चाहते हैं, तो आज ही अपने पास के कुम्हार भाई से एक अच्छी सी मिट्टी की हांडी खरीद कर लाएं। इससे न केवल आपकी सेहत सुधरेगी, बल्कि हमारे उन कलाकारों की भी मदद होगी जो सदियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं।

उम्मीद है कि मेरा यह छोटा सा अनुभव आपके काम आएगा। अगर आपके मन में कोई सवाल हो कि मिट्टी के बर्तन कहाँ से लें या उन्हें साफ कैसे करें, तो बेझिझक पूछिएगा। चलिए, आज से ही एक स्वस्थ जीवन की शुरुआत करते हैं!