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मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने के लिए बिगिनर गाइड और बेस्ट सेट

अपनी रसोई में दादी-नानी का स्वाद लाने के लिए मिट्टी के बर्तनों के अद्भुत फायदे जानें। इस बिगिनर गाइड में नए बर्तनों को तैयार करने का तरीका, सफाई टिप्स और बेस्ट मिट्टी के बर्तन सेट की लिस्ट पाएं।मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने के लिए बिगिनर गाइड और बेस्ट सेट

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Rajesh Kumar

5/2/20261 मिनट पढ़ें

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने के लिए बिगिनर गाइड और बेस्ट सेट
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने के लिए बिगिनर गाइड और बेस्ट सेट

मेरे प्यारे दोस्तों, क्या आपको याद है बचपन में जब हम दादी या नानी के घर जाते थे, तो वहां दाल का स्वाद कुछ अलग ही होता था? वह धीमी आंच पर चूल्हे पर रखे मिट्टी के हांडी में पकती दाल की खुशबू आज भी मेरे जेहन में ताज़ा है। आज के इस भागदौड़ भरे जीवन में हमने प्रेशर कुकर और नॉन-स्टिक पैन को तो अपना लिया, लेकिन कहीं न कहीं हम उस असली स्वाद और सेहत को पीछे छोड़ आए हैं।

आज मैं आपको मिट्टी के बर्तनों की उस दुनिया में वापस ले चलना चाहता हूँ, जो न केवल हमारे पूर्वजों की विरासत है, बल्कि आज के दौर में स्वस्थ रहने का एक बेहतरीन ज़रिया भी है। अगर आप पहली बार मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं, तो घबराइए मत, मैं आपके सारे डर और सवालों के जवाब यहाँ आसान भाषा में दूँगा।

मिट्टी के बर्तनों में ही खाना क्यों पकाएं?

जहाँ तक वास्तविकता की बात है, हम लोग आज के समय में एल्युमीनियम और टेफ्लॉन कोटिंग वाले बर्तनों के इतने आदी हो गए हैं कि हमें लगता है यही सबसे अच्छा है। लेकिन सच तो यह है कि मिट्टी के बर्तन प्रकृति का हमें दिया हुआ एक वरदान हैं।

मिट्टी के बर्तनों में छोटे-छोटे छिद्र (Pores) होते हैं। जब आप इसमें खाना पकाते हैं, तो गर्मी और नमी पूरे बर्तन में बहुत ही धीरे और बराबर तरीके से फैलती है। इसका फायदा यह होता है कि खाने के प्राकृतिक पोषक तत्व और तेल बर्तन के अंदर ही रहते हैं। मेरे अनुभव में आया है कि मिट्टी के बर्तन में बनी सब्ज़ी में ऊपर से बहुत ज़्यादा तेल डालने की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि मिट्टी खाने की नमी को बरकरार रखती है।

एक और कमाल की बात यह है कि मिट्टी क्षारीय (Alkaline) होती है। हमारे खाने में अक्सर एसिडिक गुण होते हैं, और मिट्टी उस एसिड को बैलेंस कर देती है। इससे खाना न केवल पचाने में आसान होता है, बल्कि एसिडिटी की समस्या भी कम होती है।

मिट्टी का बर्तन खरीदने से पहले यह ज़रूर देखें

बाज़ार में जब आप मिट्टी के बर्तन लेने जाएंगे, तो आपको बहुत सारे विकल्प दिखेंगे। कुछ बहुत चमक रहे होंगे और कुछ बिल्कुल साधारण। यहाँ आपको थोड़ा सावधान रहने की ज़रूरत है।

मैंने देखा है कि अक्सर लोग चमकने वाले (Glazed) मिट्टी के बर्तन खरीद लेते हैं क्योंकि वे सुंदर दिखते हैं। लेकिन मेरे दोस्त, वह चमक अक्सर लेड (Lead) या खतरनाक रसायनों की वजह से होती है। खाना पकाने के लिए हमेशा अनग्लेज़्ड (Unglazed) या बिना चमक वाले बर्तन ही चुनें। ये गहरे लाल या भूरे रंग के होते हैं और छूने पर थोड़े खुरदरे लग सकते हैं। यही असली मिट्टी की पहचान है।

आइए अब जानते हैं कि नया बर्तन घर लाने के बाद आपको सबसे पहले क्या करना चाहिए।

नए बर्तन को तैयार करने का तरीका (Seasoning)

मिट्टी का बर्तन सीधे बाज़ार से लाकर चूल्हे पर नहीं चढ़ाया जाता। इसे 'सीजनिंग' की ज़रूरत होती है। अगर आप सीधे पकाना शुरू करेंगे, तो बर्तन चटक सकता है।

सबसे पहले बर्तन को साफ़ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद उसे एक बड़ी बाल्टी या टब में पानी भरकर पूरी रात (कम से कम 12-15 घंटे) के लिए डुबोकर रख दें। अगले दिन उसे बाहर निकालें और पूरी तरह सूखने दें। जब वह सूख जाए, तो उसके अंदर और बाहर थोड़ा सा कुकिंग ऑयल (जैसे सरसों या नारियल का तेल) लगा दें। अब इसमें थोड़ा पानी भरकर धीमी आंच पर 10-15 मिनट के लिए गर्म करें और फिर उस पानी को फेंक दें। बस, आपका बर्तन अब खाना पकाने के लिए बिल्कुल तैयार है!

खाना पकाने के दौरान बरतने वाली सावधानियां

मिट्टी के बर्तन थोड़े नाज़ुक मिज़ाज के होते हैं, इसलिए इन्हें प्यार से संभालना पड़ता है। अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि पकाने के दौरान क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए:

आंच का ध्यान रखें:

कभी भी मिट्टी के बर्तन को तेज़ आंच पर न रखें। मिट्टी धीरे-धीरे गर्म होती है और लंबे समय तक गर्मी को रोक कर रखती है। हमेशा धीमी या मध्यम आंच का इस्तेमाल करें।

अचानक तापमान न बदलें:

फ्रिज से निकाला हुआ ठंडा बर्तन सीधे चूल्हे पर न रखें, और गर्म बर्तन को सीधे ठंडे फर्श या ठंडे पानी के नीचे न ले जाएं। इससे बर्तन तुरंत टूट सकता है।

लकड़ी के चम्मच:

स्टील या धातु के कड़छी की जगह लकड़ी के चम्मच का इस्तेमाल करें। इससे बर्तन की सतह सुरक्षित रहती है।

मिट्टी के बर्तनों की सफाई कैसे करें?

यह एक बहुत ही ज़रूरी सवाल है जो अक्सर लोग पूछते हैं। मुझे लगता है कि सबसे बड़ी गलती हम यहाँ यह करते हैं कि हम उसी बर्तन धोने वाले साबुन या लिक्विड का इस्तेमाल करते हैं जो हम बाकी बर्तनों के लिए करते हैं।

याद रखिए, मिट्टी के बर्तन में छोटे छेद होते हैं। अगर आप साबुन इस्तेमाल करेंगे, तो मिट्टी उस साबुन को सोख लेगी और अगली बार जब आप खाना बनाएंगे, तो वह साबुन आपके खाने में मिल जाएगा।

बर्तन साफ़ करने के लिए बस गर्म पानी और एक मुलायम ब्रश या नारियल के छिलके का इस्तेमाल करें। अगर बर्तन बहुत गंदा है, तो आप थोड़ा सा बेकिंग सोडा या नींबू का रस इस्तेमाल कर सकते हैं। धोने के बाद इसे धूप में या हवा में अच्छी तरह सूखने दें ताकि इसमें फफूंद (Mold) न लगे।

बिगिनर्स के लिए बेस्ट सेट: आपको क्या-क्या खरीदना चाहिए?

अगर आप शुरुआत कर रहे हैं, तो आपको पूरा किचन बदलने की ज़रूरत नहीं है। आप कुछ खास बर्तनों से शुरुआत कर सकते हैं जो आपके रोज़मर्रा के काम आएंगे:

1. मिट्टी की हांडी (Clay Pot/Handi)

दाल, चावल या कोई भी रसेदार सब्ज़ी बनाने के लिए यह सबसे बेहतरीन है। इसमें बनी दाल का जो सौंधापन होता है, वह आपको किसी और चीज़ में नहीं मिलेगा।

2. मिट्टी की कड़ाही (Clay Kadai)

सूखी सब्ज़ियाँ या भुनी हुई चीज़ों के लिए आप कड़ाही ले सकते हैं। ध्यान रहे कि इसमें बहुत ज़्यादा डीप फ्राई करने से बचें, साधारण भुनाई के लिए यह लाजवाब है।

3. मिट्टी का तवा (Clay Tawa)

ट्रस्ट मी, मिट्टी के तवे पर बनी रोटी का स्वाद बिल्कुल वैसा ही होता है जैसे गांव के चूल्हे की रोटी। रोटी फूली हुई और नरम बनती है। हाँ, इसे गर्म होने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन नतीजा शानदार होता है।

4. पानी का घड़ा (Clay Water Pot)

अगर आप फ्रिज का ठंडा पानी पीकर परेशान हैं, तो एक मिट्टी का घड़ा ज़रूर लें। यह पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा करता है और इसके पानी से गले को कोई नुकसान नहीं होता।

मेरे कुछ निजी सुझाव

जब मैंने पहली बार मिट्टी के बर्तन में खाना बनाना शुरू किया था, तो पहली दो बार दाल थोड़ी जल गई थी क्योंकि मुझे आंच का अंदाज़ा नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि मिट्टी का बर्तन चूल्हा बंद करने के बाद भी लगभग 5-10 मिनट तक पकता रहता है। इसलिए, जब खाना 90% पक जाए, तभी आंच बंद कर दें।

एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ। मेरी एक दोस्त है जो हमेशा पेट की खराबी से परेशान रहती थी। मैंने उसे बस अपना तवा और दाल वाली हांडी बदलने की सलाह दी। एक महीने बाद उसने मुझे फोन करके बताया कि अब उसे भारीपन महसूस नहीं होता और खाने का स्वाद इतना बढ़ गया है कि उसके बच्चे भी अब बाहर का खाना कम मांगते हैं।

मिट्टी से जुड़ना सिर्फ एक ट्रेंड नहीं है, यह अपनी जड़ों की तरफ लौटने का एक तरीका है। यह हमें सिखाता है कि अच्छी चीज़ें समय लेती हैं। धीमी आंच पर पकता खाना और उसकी खुशबू आपके घर के माहौल को ही बदल देगी।

तो, क्या आप तैयार हैं अपने किचन में इस छोटे से लेकिन बड़े बदलाव के लिए? शुरुआत एक छोटे तवे या हांडी से कीजिए, और मुझे यकीन है कि आप इसके दीवाने हो जाएंगे।

मिट्टी के बर्तनों में पकाना सिर्फ खाना बनाना नहीं, बल्कि एक थेरेपी जैसा है। इसे आज़माकर देखें और अपने अनुभव मेरे साथ ज़रूर शेयर करें!