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ताजे फलों का जूस निकालने के लिए सबसे बढ़िया हैंड प्रेस जूसर

क्या आप बाज़ार के डिब्बाबंद जूस से थक चुके हैं? जानिए कैसे हैंड प्रेस जूसर का उपयोग करके ताजे फलों का असली स्वाद प्राप्त करें। बिजली वाले जूसर की झंझट छोड़कर सेहतमंद और बजट फ्रेंडली तरीका अपनाएं।ताजे फलों का जूस निकालने के लिए सबसे बढ़िया हैंड प्रेस जूसर

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Rajesh Kumar

4/16/20261 मिनट पढ़ें

ताजे फलों का जूस निकालने के लिए सबसे बढ़िया हैंड प्रेस जूसर
ताजे फलों का जूस निकालने के लिए सबसे बढ़िया हैंड प्रेस जूसर

मेरे प्यारे दोस्तों, कैसे हैं आप सब? उम्मीद है सब बढ़िया होगा। आज मैं आपसे एक ऐसी चीज़ के बारे में बात करने वाला हूं जो मेरी रसोई का सबसे जरूरी हिस्सा बन गई है।

हम सब जानते हैं कि सुबह-सुबह एक गिलास ताज़ा जूस मिल जाए तो पूरा दिन बन जाता है। लेकिन सच कहूं? बिजली वाले बड़े-बड़े जूसर निकालना, उन्हें चलाना और फिर सबसे मुश्किल काम—उसे साफ करना—ये सोचकर ही मेरा जूस पीने का मन मर जाता था। मैंने देखा है कि बहुत से लोग इसी आलस में बाज़ार का डिब्बाबंद जूस पीने लगते हैं। पर जहां तक वास्तविकता की बात है, उन डिब्बों में सिर्फ चीनी और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, असली फल तो कहीं खो जाते हैं।

यहीं एंट्री होती है हैंड प्रेस जूसर की। पिछले कुछ महीनों में मैंने महसूस किया कि अगर आपको संतरा, मौसंबी या अनार का असली स्वाद चाहिए, तो हाथों से दबाकर निकाला गया जूस ही बेस्ट है। अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि आखिर ये हैंड प्रेस जूसर इतना खास क्यों है और आपको कौन सा लेना चाहिए।

हैंड प्रेस जूसर ही क्यों चुनें?

जब मैंने पहली बार हैंड प्रेस जूसर खरीदने का सोचा, तो मेरे एक दोस्त ने हँसते हुए कहा, "भाई, इस ज़माने में हाथ से मेहनत कौन करता है? मिक्सर ग्राइंडर ले ले।" पर मैंने ज़िद पकड़ी थी। मुझे वह कड़वाहट नहीं चाहिए थी जो अक्सर बिजली वाले जूसर में बीजों के पिस जाने से आ जाती है।

मेरे अनुभव में आया है कि हैंड प्रेस जूसर के तीन सबसे बड़े फायदे हैं:

बीजों की कड़वाहट नहीं: जब हम बिजली वाली मशीन में संतरा डालते हैं, तो कई बार बीज भी पिस जाते हैं। इससे जूस का स्वाद बिगड़ जाता है। हैंड प्रेस में सिर्फ फल दबता है, बीज साबुत रह जाते हैं।

सफाई में आसान: मुझे सबसे ज्यादा नफरत मशीन के वो 10 पुर्जे धोने से है। हैंड प्रेस जूसर को बस नल के नीचे रखा और 2 मिनट में वह चमक जाता है।

बिजली की कोई टेंशन नहीं: सुबह-सुबह मशीन का वह शोर पूरे घर को जगा देता है। हैंड प्रेस एकदम शांत है। आप चुपचाप अपना जूस निकालें और सुकून से पिएं।

अनार के लिए सबसे बेहतरीन हैंड प्रेस जूसर

अनार का जूस निकालना सबसे टेढ़ी खीर है। अगर आपने कभी घर पर कोशिश की है, तो आप जानते होंगे कि इसके दाने निकालने में ही आधा घंटा निकल जाता है। लेकिन एक अच्छी क्वालिटी का कास्ट आयरन हैंड प्रेस जूसर इस काम को चुटकियों में कर देता है।

मैंने खुद एक भारी वाला जूसर इस्तेमाल किया है जो दिखने में किसी पुरानी मशीन जैसा लगता है। इसमें एक लंबा हैंडल होता है। आपको बस अनार को दो टुकड़ों में काटना है, उसे मशीन के बीच में रखना है और हैंडल को धीरे से नीचे दबाना है।

मेरी सलाह: अगर आप अनार के शौकीन हैं, तो हल्का प्लास्टिक वाला जूसर मत लीजिएगा। वह अनार का दबाव नहीं झेल पाता। हमेशा भारी लोहे या एल्यूमीनियम वाला जूसर ही चुनें। यह सालों-साल चलता है और जूस भी पूरा निकालता है।

संतरा और मौसंबी जूसर: सुबह की ताजगी

मुझे याद है, बचपन में मेरी नानी के पास एक छोटा सा प्लास्टिक का जूसर होता था, जिसे गोल-गोल घुमाना पड़ता था। वह भी अच्छा था, लेकिन उसमें मेहनत बहुत लगती थी। आज के जो आधुनिक हैंड प्रेस जूसर आ रहे हैं, वे 'लीवर' के सिद्धांत पर काम करते हैं।

इसमें आपको फल को घुमाने की जरूरत नहीं पड़ती। बस आधा कटा संतरा रखा और प्रेस कर दिया। मुझे लगता है कि मौसंबी के लिए यह वरदान है। मौसंबी का जूस अगर थोड़ी देर भी मशीन में ज्यादा घूम जाए, तो वह कड़वा होने लगता है। हैंड प्रेस से निकला जूस एकदम मीठा और ताज़ा रहता है।

क्या स्टील वाला जूसर सबसे अच्छा होता है?

अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या हमें स्टील का जूसर लेना चाहिए? देखिए, मार्केट में दो तरह के जूसर खूब चलते हैं। एक तो वो जो भारी मेटल (Aluminium या Cast Iron) के बने होते हैं, और दूसरे जो पूरी तरह स्टेनलेस स्टील के होते हैं।

स्टील वाले जूसर दिखने में बहुत सुंदर और चमकदार होते हैं। इनमें जंग लगने का खतरा बिल्कुल नहीं होता। लेकिन एक बात ध्यान रखिएगा, स्टील के जूसर थोड़े महंगे हो सकते हैं। अगर आपका बजट अच्छा है और आप चाहते हैं कि रसोई में रखी चीज़ प्रीमियम दिखे, तो बेझिझक स्टील वाला मॉडल चुनें। लेकिन अगर आप काम की बात करें, तो एल्यूमीनियम वाले जूसर भी वही काम आधी कीमत में कर देते हैं।

जूसर खरीदते समय इन 3 बातों का ध्यान रखें

बाज़ार में इतने सारे विकल्प हैं कि कोई भी उलझ सकता है। मैंने अपनी रिसर्च के दौरान कुछ चीजें सीखी हैं जो आपको देखनी चाहिए:

1. बेस की मजबूती

जब आप जूस निकालने के लिए हैंडल दबाते हैं, तो मशीन को अपनी जगह से हिलना नहीं चाहिए। मैंने कुछ सस्ते जूसर देखे हैं जो दबाते ही आगे की तरफ झुक जाते हैं। हमेशा ऐसा जूसर लें जिसका नीचे का हिस्सा (Base) चौड़ा और भारी हो। कुछ में नीचे रबर के पैर (Vacuum caps) लगे होते हैं जो ज़मीन पर चिपक जाते हैं, वे सबसे बढ़िया रहते हैं।

2. कप का साइज

जिस हिस्से में आप फल रखते हैं, उसे 'कप' या 'स्ट्रेनर' कहते हैं। अगर यह छोटा होगा, तो बड़े साइज के संतरे या अनार इसमें फिट नहीं आएंगे। कोशिश करें कि बड़े कप वाला जूसर ही लें ताकि आपको फल के बहुत छोटे टुकड़े न करने पड़ें।

3. हैंडल की लंबाई

हैंडल जितना लंबा होगा, आपको उतनी ही कम ताकत लगानी पड़ेगी। यह विज्ञान है! इसलिए छोटा हैंडल वाला जूसर न लें, वरना जूस निकालते-निकालते आपके हाथ थक जाएंगे।

जूस निकालने का सही तरीका क्या है?

आइए अब जानते हैं कि सही तरीके से जूस कैसे निकाला जाए ताकि एक बूंद भी बर्बाद न हो। बहुत से लोग फल को सीधा रख देते हैं, जिससे रस पूरी तरह नहीं निकलता।

फल को सही से काटें: हमेशा फल को बीच से (Horizontally) काटें।

छिलका ऊपर की तरफ: संतरे या अनार का छिलका ऊपर की तरफ रखें और कटा हुआ हिस्सा नीचे की जाली की तरफ।

धीरे से दबाएं: अचानक से झटका न दें। धीरे-धीरे हैंडल को नीचे लाएं ताकि रस को निकलने का रास्ता मिले।

दो बार प्रेस करें: एक बार दबाने के बाद, फल की पोजीशन थोड़ी बदलकर दोबारा दबाएं। आप देखेंगे कि थोड़ा और जूस निकल आता है।

क्या इसमें सफाई करना मुश्किल है?

बहुत से लोग मुझसे कहते हैं कि "यार, ये मशीनें बहुत गंदी हो जाती हैं।" सच कहूं तो यह आपकी सोच पर निर्भर करता है। जहां तक मेरा अनुभव है, हैंड प्रेस जूसर को साफ करना सबसे आसान काम है।

इसमें आमतौर पर दो या तीन हिस्से होते हैं जो अलग हो जाते हैं। जूस निकालने के तुरंत बाद उन्हें पानी से धो लें। अगर आप रस को सुखा देंगे, तो वह चिपक जाएगा और फिर मेहनत करनी पड़ेगी। मैं तो बस जूस निकालते ही जाली को सिंक में ले जाता हूं और सादे पानी से धो देता हूं। बस हो गया काम! न कोई साबुन की झंझट, न रगड़ने की टेंशन।

एल्यूमीनियम बनाम कास्ट आयरन: कौन सा बेहतर?

यह एक बड़ा सवाल है। एल्यूमीनियम जूसर हल्के होते हैं और उन पर जंग नहीं लगता। ये रसोई में इधर-उधर ले जाने में आसान होते हैं। वहीं कास्ट आयरन (लोहे) वाले जूसर बहुत भारी होते हैं और बहुत ताकतवर होते हैं।

अगर आप बहुत ज्यादा अनार का जूस निकालते हैं, तो लोहे वाला लें। लेकिन अगर आप सिर्फ संतरा या नींबू के लिए ढूंढ रहे हैं, तो एल्यूमीनियम वाला आपके लिए परफेक्ट है। बस ध्यान रखें कि एल्यूमीनियम अच्छी क्वालिटी का हो ताकि वह फलों के एसिड से खराब न हो।

क्या हैंड प्रेस जूसर बच्चों के लिए सुरक्षित है?

बिल्कुल! मेरे घर में जब छोटे बच्चे आते हैं, तो वे इसे चलाने के लिए बहुत उत्साहित रहते हैं। क्योंकि इसमें कोई तेज धार वाले ब्लेड नहीं होते और न ही बिजली का डर होता है, इसलिए यह बच्चों के लिए काफी सुरक्षित है। बस यह ध्यान रखें कि वे भारी हैंडल पर अपनी उंगलियां न फंसा लें। यह एक मजेदार तरीका है बच्चों को फलों के करीब लाने का।

मेरी आखिरी राय

मुझे लगता है कि हर उस घर में एक हैंड प्रेस जूसर होना चाहिए जो सेहत को लेकर थोड़ा भी गंभीर है। यह एक ऐसी चीज़ है जिसमें आप एक बार पैसे लगाते हैं और यह सालों-साल आपका साथ देती है। कोई बिजली का बिल नहीं, कोई शोर नहीं, और सबसे जरूरी—आपको मिलता है 100% शुद्ध और ताज़ा जूस।

मैंने देखा है कि लोग हज़ारों रुपये की जिम की मेंबरशिप ले लेते हैं, लेकिन एक अच्छी जूस निकालने वाली मशीन पर खर्च करने में हिचकिचाते हैं। पर सच तो यही है कि सेहत रसोई से शुरू होती है, जिम से नहीं।

तो दोस्तों, अगर आप भी सोच रहे हैं कि कौन सा जूसर लें, तो एक अच्छा भारी हैंड प्रेस जूसर घर ले आइए। आप खुद फर्क महसूस करेंगे कि बाज़ार के जूस और घर के ताज़ा निकाले हुए जूस में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

उम्मीद है कि मेरा यह छोटा सा अनुभव आपके काम आएगा। अगर आपके मन में कोई सवाल हो या आप किसी खास ब्रैंड के बारे में पूछना चाहते हों, तो बेझिझक मुझसे बात करें। खुश रहें, स्वस्थ रहें और ताज़ा जूस पीते रहें!